पुतिन का BRICS में अमेरिका सहित G-7 पर तंज : बोले - दुनिया की GDP का 40% से ज़्यादा हिस्सा ब्रिक्स देशों ने पैदा किया, G7 का योगदान सिर्फ 29% रहा

फोटो  : फाइल फोटो 

नई दिल्ली, 11 सितंबर 2026
रिपोर्ट  : एडिटर 

ब्रिक्स बिज़नेस फोरम के लीडर्स सेशन में, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि ब्रिक्स की हिस्सेदारी दुनिया की अर्थव्यवस्था में करीब 40% है, जबकि G7 की 18%। यानी आर्थिक आकार में ब्रिक्स आगे बताया है।

पुतिन ने कहा कि पिछले 5 सालों में, दुनिया की GDP का 40% से ज़्यादा हिस्सा ब्रिक्स देशों ने पैदा किया है, जबकि तथाकथित G7 - यानी 'ग्रेट 7' का योगदान सिर्फ़ 29% रहा है। इसी दौरान दुनिया की इकॉनमी में हुई ग्रोथ की बात करें, तो हम देखते हैं कि उस ग्रोथ का आधे से ज़्यादा हिस्सा ब्रिक्स का रहा है, जबकि G7 का हिस्सा सिर्फ़ 18% रहा है। ऐसा क्यों है? जवाब आसान है, दुनिया की आधी से ज़्यादा आबादी ब्रिक्स देशों में रहती है और इसीलिए, उनके पास बहुत ही गतिशील और जीवंत घरेलू बाज़ार हैं

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि अभी दुनिया में गहरे और बुनियादी बदलाव हो रहे हैं। इसकी वजह यह है कि जो देश 20वीं सदी के दूसरे हिस्से में आर्थिक विकास में सबसे आगे थे, उनकी जगह अब विकास के नए इंजन ले रहे हैं। जब मैं 'पुराने' कहता हूँ, तो हम सभी समझते हैं कि हम किस बारे में बात कर रहे हैं।

पुतिन ने आगे कहा कि इन तथाकथित पुराने नेताओं के पास अभी भी बहुत मज़बूत पक्ष और अच्छी तरह से विकसित इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी और वैज्ञानिक फ़ायदे, वैज्ञानिक स्कूल आदि मौजूद हैं। चीज़ों का स्वभाव ऐसा है मानवता और अर्थव्यवस्था का स्वभाव ऐसा है कि दुनिया हमेशा बदलती रहती है

21 देशों क परिवार :-

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस साल हम BRICS के 20 साल मना रहे हैं। 2006 में जब इस समूह की शुरुआत हुई थी तो इसमें सिर्फ 4 देश थे और आज BRICS एवं उनके पार्टनर को मिलाकर 21 देशों का हमारा परिवार है।

मोदी ने कहा कि आज BRICS के देश दुनिया की 50 प्रतिशत जनसंख्या, 40 प्रतिशत GDP और 25 प्रतिशत से अधिक ट्रेड को प्रदर्शित करते हैं। इतना ही नहीं, इन वर्षों में जहां ग्लोबल GDP करीब ढाई गुना हुई है, वहीं BRICS देशों की कंबाइन GDP करीब साढ़े चार गुना हुई है

पीएम मोदी ने कहा कि BRICS देश ग्लोबल इनोवेशन और सॉल्यूशन के लिए अहम केंद्र के तौर पर भी बन रहे हैं। हमारे देशों में इनोवेशन के लिए नई संभावनाएँ आकार ले रही हैं, जिनमें ज़मीनी स्तर की पहलों से लेकर अत्याधुनिक तकनीकें तक शामिल हैं। ब्रिक्स का बढ़ता दायरा, रफ़्तार और उम्मीदें हम सबके बीच साफ़ तौर पर दिखाई देती हैं। भारत में आयोजित यह फ़ोरम अब तक का सबसे बड़ा ब्रिक्स बिज़नेस फ़ोरम है।

दुनिया मुश्किल दौर में :-

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा कि आज दुनिया अपने सबसे मुश्किल दौर से गुज़र रही है। जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता, सप्लाई चेन में रुकावट और राजनीतिक दबाव बनाने के लिए आर्थिक साधनों का बढ़ता इस्तेमाल; इन सब ने उस आर्थिक माहौल को और जटिल बना दिया है जिसमें देश काम करते हैं। सवाल यह है कि इन चुनौतियों पर ब्रिक्स का क्या जवाब है?

हमारा मानना है कि ब्रिक्स की असली ताकत सिर्फ़ उसके सदस्य देशों की अर्थव्यवस्था के आकार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तब और साफ़ तौर पर दिखती है जब इन क्षमताओं को व्यापार, निवेश और जॉइंट फाइनेंसिंग के नेटवर्क में बदला जाता है, यानी संभावित सहयोग से असल कामकाज वाले सहयोग की ओर बढ़ना।

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