फोटो : फाइल फोटो
नई दिल्ली, 07 जुलाई 2026
रिपोर्ट : एडिटर
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान चोरी का मामला सामने आने के बाद देश की राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। इस बेहद संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल मुद्दे पर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
पूर्व मुख्यमंत्री ने राममंदिर मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराने की मांग की है। साथ ही मौजूदा राममंदिर ट्रस्ट को भंग करने की मांग भी उठाई है। गहलोत ने यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ को नया ट्रस्ट बनाकर योगी आदित्यनाथ को उसका अध्यक्ष बनने का सुझाव दिया है।
लोगों के साथ विश्वासघात :-
इस दौरान उन्होंने राजस्थान राज्य के संदर्भ को जोड़ते हुए एक सनसनीखेज बयान दिया। पूर्व मुख्यमंत्री ने राम मंदिर निर्माण में राजस्थान के भरतपुर जिले के बंसी पहाड़पुर के पत्थरों के ऐतिहासिक योगदान का ज़िक्र किया और कहा कि मरुधरा के लोगों का इस मंदिर से एक बेहद गहरा और पवित्र भावनात्मक लगाव है, क्योंकि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने तमाम कानूनी अड़चनों को दूर कर मंदिर निर्माण के लिए लीगल तरीके से पत्थर भिजवाया था। ऐसे में इतने पवित्र स्थान पर करोड़ों रुपये के चढ़ावे की कथित चोरी होना देश की आम जनता के भरोसे के साथ एक बड़ा विश्वासघात है।
अशोक गहलोत ने प्रेस वार्ता में सालों पुराने घटनाक्रम का खुलासा करते हुए बताया कि जब अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हो रहा था, तब भरतपुर के बंसी पहाड़पुर इलाके में बड़े पैमाने पर अवैध खनन चल रहा था और वहीं का पत्थर मंदिर के लिए ले जाया जा रहा था।
गहलोत ने कहा, "उस समय श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय जी और उनके सहयोगी दिनेश जी मुझसे जयपुर में आकर मिले थे। मैंने उनसे साफ शब्दों में कहा था कि आप राम मंदिर जैसा बेहद पवित्र और ऐतिहासिक काम करने जा रहे हैं, इसलिए इस महान कार्य में किसी भी तरह के अवैध पत्थर का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। आपको वहां केवल लीगल माइनिंग का प्रमाणित पत्थर ही ले जाना चाहिए, ताकि मंदिर की पवित्रता पर कोई आंच न आए।"
मामले की गंभीरता को समझा:-
गहलोत ने बताया, "हमने पूरे मामले की गंभीरता को समझा और राम मंदिर की जनभावनाओं का आदर करते हुए राज्य सरकार की तरफ से उस पूरे क्षेत्र को फॉरेस्ट लैंड की केटेगरी से बाहर निकालने की मजबूत सिफारिश केंद्र को भेजी।"
उन्होंने बताया, "राम मंदिर का मामला होने के कारण हमने फाइलों को बहुत तेजी से क्लियर करवाया, वरना जिन प्रशासनिक कामों में बरसों लग जाते हैं, उसे हमारी सरकार ने स्मूथली पूरा करवाकर लीगल तरीके से पत्थर उपलब्ध कराया। उस वक्त ट्रस्ट की ओर से हमें धन्यवाद भी दिया गया था।"
गहलोत ने कहा कि पहले पीवी नरसिम्हा राव के समय सभी विचारधाराओं के लोग थे, अगर उस समय की तरह ट्रस्ट बनता तो आज यह नौबत नहीं आती। इन्होंने वीएचपी, आरएसएस के लोगों को ही ट्रस्ट में मेंबर बना दिया, ट्रस्ट में किसी की जिम्मेदारी तय नहीं की।
गहलोत ने कहा कि राममंदिर के चढ़ावे में हुई चोरी से हर हिंदू दुखी है। उसकी आस्था को चोट पहुंची है। इस पवित्र काम में भी चोरी हो जाए, पूरे देश के अंदर हर गांव में, हर घर में चर्चा होने लग गई है। यह एक विश्वासघात वाली बात हो गई।
खबरों के लिए सिर्फ हिंदुस्तान डिजिटल न्यूज़, व्हाट्स ऐप्प No. 9358447558
Leave a Comment