फोटो : फाइल फोटो
नीमकाथाना , 06 अगस्त 2025
रिपोर्ट : किशोर सिंह लोचिब
नीमकाथाना की होनहार बेटी ज्योति नटवाड़िया ने पांचवीं हांगकांग अंतरराष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिता (चीन) में 53 किलोग्राम भार वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीतकर देश, समाज और अपने गांव का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर रोशन किया है।
घुटने में लगी चौट :-
ज्योति की यह उपलब्धि इसलिए भी खास बन जाती है क्योंकि मुकाबले से पहले ही उसके घुटने में गंभीर चोट लग गई थी। इसके बावजूद उन्होंने साहस और आत्मबल के साथ अखाड़े में उतरते हुए दमदार प्रदर्शन किया और गोल्ड मेडल भारत की झोली में डाला।
इतना ही नहीं, ज्योति के पिता सुरेश पहलवान बीते तीन महीनों से एक दुर्घटना के चलते हाथ फ्रैक्चर होने के कारण बिस्तर पर आरामरत हैं। ऐसे समय में जब परिवार मानसिक और आर्थिक दोनों रूप से संघर्ष कर रहा था, बेटी ने हिम्मत नहीं हारी और अपने बुलंद हौसलों से पूरे देश को गर्वित किया।
बड़े भाई राकेश नटवाड़िया ने जानकारी देते हुए बताया, "जब घर में चुनौतियाँ हों और बेटी मैदान में उतरकर देश के लिए गोल्ड जीत लाए, तो वो सिर्फ पदक नहीं बल्कि पूरे परिवार की उम्मीद और संघर्ष की जीत होती है। हमें अपनी बहन पर गर्व है।"
परिवार, समाज और गांव की ओर से बेटी ज्योति को ढेरों बधाइयाँ और शुभकामनाएँ दी जा रही हैं। गांव ढाणी गुमानसिंह सहित पूरा जाट समाज और नीमकाथाना क्षेत्र इस गौरवशाली उपलब्धि पर खुशी और गर्व का अनुभव कर रहा है।
ज्योति नटवाड़िया की यह जीत इस बात का प्रमाण है कि विपरीत परिस्थितियाँ अगर साहस और संकल्प से लड़ी जाएँ, तो सफलता तय है।
ज्योति माता और पिता सुरेश पहलवान ने बताया कि बेटी पिछले 5 वर्षों से गणेश्वर स्थित सरजी अखाड़ा में नियमित अभ्यास कर रही हैं और इससे पहले कई राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में पदक जीत चुकी हैं। यह उनका पहला अंतरराष्ट्रीय पदक है।
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