वीडियो न्यूज़ : मंडोली गांव में प्रस्तावित खनन पट्टे का विरोध : प्रस्तावित खनन पट्टे के लिए आयोजित जनसुनवाई में हंगामा, ग्रामीणों उतरे विरोध में; बोले - पहले गांव को विस्थापित करें या खनन बंद करें.

फोटो  : फाइल फोटो 

नीमकाथाना, 22 मई 2026
रिपोर्ट  : किशोर सिंह लोचिब 

नीमकाथाना के निकटवर्ती ग्राम मंढोली में प्रस्तावित खनन पट्टा 60 की पर्यावरण स्वीकृति को लेकर शुक्रवार को जनसुनवाई आयोजित हुई । जनसुनवाई में ग्रामीणों ने प्रस्तावित खनन पट्टे का विरोध किया ।इस दौरान ग्रामीणों ने मौखिक एवं लिखित रूप से अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करवाईं।

ग्रामीणों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि मंढोली गांव में खनन की किसी प्रकार की आवश्यकता नहीं है। गांव की पहाड़ी क्षेत्र के चारों ओर बसावट है, ऐसे में यदि सरकार खनन करवाना चाहती है तो पहले गांव को दूसरी जगह बसाया जाए। 
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ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पहले से जारी खनन पट्टों के लिए गोचर भूमि से रास्ता निकाला गया तथा कई कार्य अवैध तरीके से किए गए हैं। यदि खनन शुरू हुआ तो ग्रामीणों का गांव में रहना मुश्किल हो जाएगा, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

पटवारी की रिपोर्ट को बताया गलत :-
मंढोली सरपंच ने बताया कि जनसुनवाई में प्रजेन्टेशन दिया गया, जिसका पूरे गांव ने विरोध किया। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित खनन क्षेत्र के चारों तरफ आबादी बसी हुई है, आसपास मंदिर एवं तालाब स्थित हैं। साथ ही पटवारी द्वारा दी गई रिपोर्ट को गलत बताते हुए प्रशासन से मांग की है  कि लीज की निष्पक्ष जांच करवाने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाए

गंभीर आपत्तियां :-
सामाजिक कार्यकर्ता मनीराम यादव ने कहा कि प्रस्तावित खनन से क्षेत्र में वायु, जल, ध्वनि प्रदूषण एवं कंपन का खतरा बढ़ेगा, जिसका सीधा असर कृषि और पशुपालन पर पड़ेगा। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में मंदिर एवं सार्वजनिक धार्मिक स्थल मौजूद हैं, जिन्हें खनन से नुकसान पहुंच सकता है। इसके अलावा यातायात और सड़क सुरक्षा को लेकर भी गंभीर आपत्तियां दर्ज करवाई गई हैं।
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ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया कि गांव की पहाड़ी क्षेत्र में पिछले 10–15 वर्षों से खनन गतिविधियां संचालित हो रही हैं। पहाड़ी के आसपास बालाजी मंदिर, बाबा रामदेव मंदिर, चिलाय माता मंदिर, हनुमान मंदिर सहित अन्य धार्मिक स्थल स्थित हैं, जहां श्रद्धालुओं की निरंतर आवाजाही रहती है।

खनन गतिविधियों के कारण धार्मिक आस्था प्रभावित हो रही है तथा आमजन को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि खनन के कारण क्षेत्र में धूल, शोर एवं पर्यावरणीय प्रभाव बढ़े हैं, वहीं लगातार मशीनों के संचालन से जनजीवन प्रभावित हो रहा है।

भेजी जाएगी रिपोर्ट :-
जनसुनवाई के दौरान अतिरिक्त जिला कलेक्टर भागीरथ साख ने कहा कि ग्रामीणों द्वारा दिए गए सुझाव एवं आपत्तियों की रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भेजी जाएगी। खनन के लिए स्वीकृति जारी करना या नहीं करना सरकार के स्तर का निर्णय है।

इस दौरान अतिरिक्त जिला कलेक्टर भागीरथ साख, प्रदूषण नियंत्रण विभाग सीकर की अधिकारी सविता सहित कई प्रशासनिक अधिकारी एवं ग्रामीण मौजूद रहे।

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