एजुटेक सीरिज : अध्याय द्वितीय : भाग : 02 : अंक 02 : बौद्ध धर्म : संघ चार भागों में विभक्त था , कालान्तर में बौद्ध धर्म दो सम्प्रदायों में विभक्त हो गया था , अब सोमवार को भी

फोटो  : प्रतीकात्मक  ।

नीमकाथाना , 20 अप्रेल
रिपोर्ट  : एजुटेक टीम

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     अध्याय -02, भाग - 02 :  , अंक -02
                  विषय : सामाजिक अध्ययन

          सभ्यता संस्कृति  : बौद्ध धर्म

महाप्रजापति गौतमी और भिक्खुणी संघ की स्थापना | The Cover

बौद्ध संघ :

धर्मचक्र प्रवर्तन के बाद बुद्ध ने अपने शिष्यों के साथ धर्म के प्रचार प्रसार के लिए सारनाथ ( वाराणसी ) में बौद्ध ' संघ' की स्थापना की । संघ चार भागों में विभक्त था -

1. भिक्षु ,
2. भिक्षुणी,
3. सामान्य उपासक,
4. सामान्य उपासिका ।

संघ प्रवेश में प्रवेश के लिए माता -पिता की अनुमति अनिवार्य थी और संघ प्रवेश को उपसम्पदा कहा जाता था ।

                                         बौद्ध धर्म के सम्प्रदाय :


कालान्तर में बौद्ध धर्म दो सम्प्रदायों में विभक्त हो गया था।




1. हीनयान :- इसे श्रावकयान भी कहा जाता है । यह परम्परावादियों का संघ  है जो बौद्ध धर्म के प्राचीन आदर्शो को बिना किसी परिवर्तन के बनाये रखना चाहते थे ।
2. महायान सम्प्रदाय :- ये परिवर्तनवादी विचारधारा के समर्थक है । महासांघिको से ही कालान्तर में महायान का उदय हुआ, इसे बोधिसत्व ज्ञान भी कहा जाता है ।  महायान का मतलब होता है ऐसा उत्कृष्ट मार्ग जिसके माध्यम से सभी को निर्वाण का सुख प्राप्त हो सके ।
3.वज्रयान :  ये बौद्ध धर्म का परवर्ती सम्प्रदाय था । इसमें बुद्ध को अलौकिकशक्तियों वाला पुरुष माना जाता है।  ये विशेष रूप से तिब्बत व चीन में प्रचलित है ।
                                             बौद्ध धर्म के प्रसार के कारण
 

बौद्ध धर्म के प्रसार के कारण एवं संगीतियां - ANCIENT HISTORY - YouTube
1. ईश्वर और आत्मा में विश्वास नही है। वर्ण व्यवस्था व जाति प्रथा की निंदा की गई है ।
2. सरल व व्यवहारिक सिद्धांत :- इसके सिद्धांत सुबोध व गृहस्थ लोगो के अनुकूल थे। इनको जनसाधारण आसानी से अपना सकता था ।
3. अनुकूल वातावरण :  ये धर्म जब उदय हुआ तब प्रचलित धर्म की सुधिवादिता, कर्मकांड आदि से लोग क्षुब्द थे। अत: जनता ने गौतम के सरल नियमो को स्वीकार किया ।
4. जन- भाषा का प्रयोग :  बुद्ध ने अपने धर्म के प्रचार के लिए जन भाषा पालि का चयन किया था।
5. बुद्ध का व्यक्तित्व : बौद्ध धर्म की लोकप्रियता एवं द्रुतगामी प्रसार का मुख्य कारण बुद्ध का आकर्षक व्यक्तित्व था  ।
6. सामाजिक समानता का सिद्धांत : बुद्ध ने जाति प्रथा का घौर विरोध कर समानता, नैतिकता व स्वतंत्रता पर बल दिया  ।

                                   बौद्ध धर्म की अवनति के कारण

बौद्ध धर्म का पतन के क्या कारण थे | बौद्धधर्म का पतन | Baudh Dharm Ka Patan  - GK in Hindi | MP GK | GK Quiz| MPPSC | CTET | Online Gk | Hindi Grammar

1. परिवर्तित रूप :- बुद्ध ने जिस धर्म का प्रतिपादन किया था वह अत्यंत ही सरल व व्यवहारिक था किन्तु समय के साथ बौद्ध धर्म जटिलता और कट्टरता का समावेश हो गया  ।
2. राजकीय संरक्षण का नही रहना  :- मौर्य वंश की समाप्ति के बाद बौद्ध धर्म को राजकीय संरक्षण मिलना बंद हो गया ।
3. बौद्ध धर्म का विभाजन :  बुद्ध के बाद बौद्ध भिक्षुओ में आन्तरिक मतभेद हो गये और बादमे हीनयान और महायान में बंट गये । ।
4. विदेशी आक्रमण,
5.हिन्दू धर्म में सुधार,
6. बौद्ध धर्म में विकृतियाँ और नेतिक पतन,
7. संघ में स्त्रियों का प्रवेश,
8. सामाजिक कारण आदि ।

बौद्ध साहित्य
:-

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बौद्ध साहित्य पालि भाषा में लिखा गया है । बौद्ध साहित्य में भी त्रिपिटक महत्वपूर्ण है -
1. सुतपिटक : सिद्धांतो और बुद्ध के उपदेशो का वर्णन मिलता है। ये पांच भागो में विभक्त है -

(i) दीर्घ निकाय, (ii ) मज्झिम निकाय, (iii) सयुंक्त निकाय, ( iv) अन्गुतर निकाय एवं (v ) खुद्दक निकाय ।
2.अभिधम्म पिटक : बौद्ध धर्म का आध्यात्मिक व दार्शनिक विवेचन, जिसका महत्वपूर्ण ग्रंथ 'कथा-वत्थु' है जिसकी रचना मोग्गलिपुत्र  ने की ।
3.विनय पिटक :  भिक्षु-भिक्षुणियों के संघ व उनके दैनिक जीवन आचरण सम्बन्धी नियमों का वर्णन । इसके तीन भाग है - विभंग, खन्दक व परिवार ।

               अन्य प्रमुख ग्रन्थ -

ललित विस्तार, जातक कथाये , मिलिंदपन्हो - प्रथम शताब्दी ई.पू. में नागसेन द्वारा रचित , महाविभाष - संस्कृत में वसुमित्र दवारा रचित , महावस्तु, दीपवंश- पाली भाषा में रचित श्रीलंका में , महावंश -5 वीं सदी  श्रीलंका में रचित महानाम दवारा ।

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सोर्स :  डिजिटल लायब्रेरी
लेखिका : पी चौधरी
योग्यता : एमए , बीएड

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