फोटो : फाइल फोटो
खेतड़ी / नीमकाथाना, 27 नवंबर 2025
रिपोर्ट : किशोर सिंह लोचिब
पूर्व नीमकाथाना जिले के खेतड़ी उपखंड के बांसियाल गांव में पुरातात्विक उत्खनन का कार्य चल रहा है। जिसने इतिहास की एक नई परत खोल दी है। एक्सपर्ट की देखरेख में किए जा आरहे उत्खनन में लाइम पाउडर से बनी दीवारें, तांबे की रिंग, हड्डियों के औजार, आभूषण सहित अन्य एतेहासिक साक्ष्य मिले है ।
एक्सपर्ट के मुताबिक, लगभग 4500 वर्ष पुरानी ताम्रपाषाणिक संस्कृति की बस्ती अपने वास्तविक रूप में सामने आ रही है। अब तक मिले अवशेष इस क्षेत्र को हड़प्पा कालीन व्यापार और अंतर–सांस्कृतिक संपर्कों का महत्वपूर्ण केंद्र साबित कर रहे हैं।
उत्खनन में लाइम पाउडर से बनी दीवारें, तांबे की रिंग, हड्डियों के औजार, आभूषण, और कार्नेलियन पत्थर के मनके मिले हैं—जो उन्नत और सुव्यवस्थित जीवन शैली की ओर इशारा करते हैं। खास बात यह है कि पहली बार यहां घर की स्पष्ट संरचना, झोपड़ी का प्लेटफॉर्म, और घरेलू वास्तुकला के ढांचे मिले हैं। इससे बस्ती के संगठन और सामाजिक संरचना का अंदाजा मिलता है।
शोधकर्ता डॉ. ईशा प्रसाद के अनुसार, यह गणेश्वर सभ्यता का विस्तार माना जा रहा है, जिसकी हड़प्पा और गुजरात से व्यापारिक कनेक्टिविटी थी। कार्नेलियन के मनके इसका पुख्ता प्रमाण हैं।
इसके अलावा बस्ती के पास मिले गोलाकार कचरा निस्तारण गड्ढे इस बात के संकेत हैं कि उस समय भी लोग कचरे को ढककर सुरक्षित तरीके से निस्तारित करते थे—जो उनकी समझदारी और वैज्ञानिक सोच को दर्शाता है।
विधायक लिखेंगे पत्र :-
खेतड़ी विधायक इंजी धर्मपाल गुर्जर ने बताया कि उत्खननमें जो अवशेष मिले है वे खेतड़ी के पुरानी सभ्यता से जुडाव का प्रतिक है । जो खेतड़ी के लोगों के लिए गौरव की भी बात है । उन्होंने कहा कि वे राज्य सरकार से पत्र लिखकर इसकी विस्तृत जाँच की मांग करेंगे ।
बता दे कि यह उत्खनन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की अनुमति से दीर्घकालिक अनुसंधान परियोजना के तहत किया जा रहा है। चार साल के सर्वे के बाद इस वर्ष अक्टूबर में शुरू हुए उत्खनन ने अब प्राचीन राजस्थान के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।
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