फोटो : फाइल फोटो
जयपुर, 14 जनवरी 2026
रिपोर्ट : एडिटर
राजस्थान सरकार ने पंचायत-निकाय चुनाव से पहले दो संतान बाध्यता से जुड़े 30 साल पुराने कानून में संशोधन के लिए विधेयक का ड्राफ्ट अंतिम चरण में पहुंचा दिया है। इसके बाद तीन संतान होने पर भी चुनाव लड़ने की पात्रता मानी जाएगी। इसके अलावा दो अन्य अध्यादेशों के स्थान पर लाए जाने वाले विधेयकों को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है। इन चारों विधेयकों को आने वाले बजट सत्र में विधानसभा में पेश किया जाएगा।
पहले 1994 के पंचायती राज अधिनियम और 2009 के नगरपालिका अधिनियम में अध्यादेश के जरिए संशोधन की तैयारी थी, लेकिन अध्यादेश नहीं लाया गया। उसके स्थान पर अब विधेयक लाने की तैयारी चल रही है। पंचायती राज विभाग और नगरीय विकास विभागों ने अपने-अपने विधेयकों के ड्राफ्ट तैयार करके विधि विभाग भेज दिए हैं, जिनको अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
अध्यादेशों के स्थान पर आएंगे विधेयक:-
राजस्थान जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) अध्यादेश-2025: वन अधिनियम एवं काश्तकारी अधिनियम सहित अन्य छोटे अपराधों को लेकर मुकदमा चलाने के बजाय जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया। यह अध्यादेश केंद्र की तर्ज पर जन विश्वास कानून लाने के उद्देश्य से लाया गया।
अभी यह है पाबंदी:-
दरसल 27 नवंबर 1995 के बाद तीसरा बच्चा तो पंच, सरपंच, उपसरपंच, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, प्रधान, प्रमुख, पार्षद, संभापति, महापौर का चुनाव नहीं लड़ सकते। अगर किसी ने गलत जानकारी देकर चुनाव लड़ लिया तो पद चला जाता है और जेल भी होती है। राजस्थान नगरपालिका अधिनियम की धारा 24 में यह प्रावधान है, वहीं पंचायती राज अधिनियम में भी इसी तरह का प्रावधान है। कई राज्य इस प्रावधान को वर्षों पहले ही वापस ले चुके हैं।
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