फोटो : फाइल फोटो
नीमकाथाना, 18 जनवरी 2026
रिपोर्ट : किशोर सिंह लोचिब
नीमकाथाना के हीरानगर गांव निवासी मंजू धायल ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को साकार करते हुए भूगोल विषय में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर चयनित होकर गांव और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। खास बात यह है कि उन्होंने यह सफलता पहले ही प्रयास में 26वीं रैंक प्राप्त कर हासिल की।
मंजू धायल वर्तमान में मालनगर स्कूल में थर्ड ग्रेड अध्यापिका के पद पर कार्यरत हैं और 13 वर्षों से शिक्षा विभाग में अपनी सेवाएं दे रही हैं। इससे पहले वे दो बार थर्ड ग्रेड अध्यापिका रह चुकी हैं। अध्यापन कार्य के साथ-साथ उन्होंने स्वपाठी रहते हुए एमए (भूगोल) की पढ़ाई पूरी की, जो उनकी मेहनत और लगन को दर्शाता है।
बिना कोचिंग के पाया मुकाम :-
उन्होंने तीन बार RAS MAINS तक का भी सफर तय किया हालांकि सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। मंजू धायल ने कहीं भी कोचिंग नहीं ली, बल्कि घर पर ही अपने पति के साथ पढ़ाई कर यह मुकाम हासिल किया।
परिवार भी शिक्षा से जुड़ा :-
मंजू धायल का परिवार भी शिक्षा से गहराई से जुड़ा हुआ है। उनके पति स्वयं शिक्षक हैं, देवर प्रिंसिपल के पद पर कार्यरत हैं, उनकी दो बहनें सरकारी अध्यापिका हैं और पिता सेवानिवृत्त शिक्षक रह चुके हैं। शिक्षा का यही वातावरण उनकी सफलता की मजबूत नींव बना।
बता दे कि मंजू धायल हीरानगर गांव की पहली महिला अध्यापिका बनी थीं और आज वे गांव की पहली महिला असिस्टेंट प्रोफेसर बनकर एक नया इतिहास रच चुकी हैं। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर पूरे गांव में खुशी और गर्व का माहौल है।
मंजू धायल की सफलता ग्रामीण युवाओं और विशेषकर महिलाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। उनका जीवन यह संदेश देता है कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, यदि लक्ष्य बड़ा हो और मेहनत सच्ची हो, तो सफलता अवश्य मिलती है।
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