वीडियो न्यूज़ : नीमकाथाना में शुरू होगा टिब्बी जैसा जनआंदोलन : क्रेशरों के धूल प्रदूषण के खिलाफ एकजुट हुए ग्रामीण, 21 सदस्यीय ‘पर्यावरण बचाओ संघर्ष समिति’ का गठन

फोटो  : फाइल फोटो 

नीमकाथाना, 18 जनवरी 2026
रिपोर्ट  : किशोर सिंह लोचिब 

नीमकाथाना के लाखा की नांगल ग्राम में क्रेशरों से फैसले वाले प्रदूषण का मामला तुल पकड़ता जा रहा है । रविवार को ग्रामीणों ने ग्राम के बूटियां धाम मंदिर में एक मीटिंग आयोजित की। जिसमे इन क्रेशरों से फैसले वाले प्रदूषण सहित अन्य मुद्दों पर चर्चा की गई ।

मीटिंग सर्व सहमति से एक 21 सदस्य पर्यावरण बचाओ संघर्ष समिति का गठन किया गया । सभी ने धर्मपाल यादव का नाम संघर्ष समिति के अध्यक्ष के रूप में प्रतावित किया गया, जिसका सभी ने समर्थन किया । समिति के गठन के दौरान ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि यह लड़ाई अब आर-पार की होगी और पर्यावरण से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

नाथा की नांगल सरपंच प्रतिनिधि काशीराम ने बताया कि आज अवैध क्रेशरों के विरोध मीटिंग हुई । जिसमे सभी ने एक राय होकर इनके खिलाफ लड़ाई लड़ने का फैसला किया है ।

नाथा की नांगल पूर्व सरपंच बसंत यादव ने बताया कि यहाँ NGT के नियमों की पालना नही की जा रही है। इसको लेकर सभी ग्रामीण हर लड़ाई लड़ने को तैयार है । उन्होंने कहा कि क्रेशरों से उड़ने वाली धूल ने जनजीवन को नरक बना दिया है। सांस की बीमारियां, आंखों में जलन, फसलों को नुकसान और पेयजल स्रोतों के प्रदूषित होने जैसी गंभीर समस्याएं सामने आ रही हैं। इसके बावजूद प्रशासन और संबंधित विभाग आंख मूंदे बैठे हैं।

चारों तरफ धूल से त्रस्त गांव:-
बता दे कि पाटन क्षेत्र के स्यालोदड़ा, दूंगा की नांगल, श्यामपुरा, रामसिंह की ढाणी और डाबला सहित दर्जनों गांवों के लोग लगातार धूल प्रदूषण से प्रभावित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अरावली की पहाड़ियों को छलनी कर दिया गया है, जिससे पर्यावरण संतुलन बिगड़ता जा रहा है।

प्रशासन को चेतावनी:-
संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही अवैध क्रेशरों पर कार्रवाई नहीं हुई और प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण नहीं लगाया गया, तो ग्रामीण सड़क से लेकर प्रशासनिक कार्यालयों तक आंदोलन करेंगे। आवश्यकता पड़ी तो न्यायालय और एनजीटी का भी दरवाजा खटखटाया जाएगा।

जागरूक हो रही जनता:-
अरावली बचाओ अभियान के तहत अब क्षेत्र की जनता संगठित होकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में आगे आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ एक गांव या पंचायत की नहीं, बल्कि पूरे नीमकाथाना क्षेत्र के अस्तित्व की लड़ाई है।

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