फोटो : फाइल फोटो
जोधपुर, 14 मार्च 2026
रिपोर्ट : एडिटर
लद्दाख के मशहूर पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक को शनिवार दोपहर को जोधपुर सेंट्रल जेल से बाहर आ गये । करीब 170 दिनों तक सलाखों के पीछे रहने के बाद, केंद्र सरकार ने शनिवार को उनके खिलाफ लगे राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) को तुरंत प्रभाव से हटाने का फैसला लिया।
उनके जेल में रहने के दौरान कई बार उनके समर्थक मिलने पहुंचे थे, लेकिन पुलिस ने समर्थकों को मिलने नहीं दिया था। इस दौरान सीकर सांसद अमराराम भी सोनम वांगचुक से मिलने पहुंचे थे, लेकिन उनको परमिशन नहीं मिली थी। वांगचुक को जोधपुर सेंट्रल जेल में शिफ्ट करने के अगले दिन चूरू का एक युवक उनके समर्थन में तिरंगा लेकर पहुंचा था, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
शनिवार को सुबह करीब 10 बजे सोनम की पत्नी गीतांजलि जोधपुर जेल पहुंची थीं। इसके बाद कागजी कार्रवाई पूरी की गई और फिर दोपहर सवा एक बजे दोनों प्राइवेट कार में पुलिस सुरक्षा के बीच जिले से बाहर निकले।
हिंसा के बाद हुई थी गिरफ्तारी:-
सोनम वांगचुक को 24 सितंबर 2025 को लद्दाख प्रशासन ने हिरासत में लिया था, जिसके बाद 26 सितंबर को उन्हें जोधपुर जेल शिफ्ट कर दिया गया। उन पर लद्दाख में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर हुई हिंसा को भड़काने का आरोप था, जिसमें 4 लोगों की मौत हो गई थी और 150 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।
सुनवाई से पहले लिया फैसला:-
केंद्र सरकार का यह फैसला उस समय आया है जब सुप्रीम कोर्ट में वांगचुक की पत्नी गीतांजलि द्वारा दायर याचिका पर 170 दिन बाद 17 मार्च को सुनवाई होनी थी। गृह मंत्रालय के बयान के मुताबिक, लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास का माहौल बनाने के लिए वांगचुक की हिरासत खत्म करने का निर्णय लिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि वह लद्दाख के लोगों की आकांक्षाओं को संवाद के जरिए हल करने के लिए प्रतिबद्ध है।
गहलोत का ट्विट :-
सोनम वांगचुक के रिहा होने पर पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने ट्वीट किया। उन्होंने लिखा कि एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक जी की रिहाई का समाचार सुखद है, परंतु यह पूरा प्रकरण केंद्र की मोदी सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
यह कैसी विडंबना है? जो सोनम वांगचुक कभी प्रधानमंत्री मोदी जी की नीतियों के समर्थक रहे, जब उन्होंने लद्दाख के हक और पर्यावरण की आवाज उठाई, तो उन्हें NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) जैसी कठोर धाराओं में बांधकर जोधपुर जेल भेज दिया गया।
जिस व्यक्ति को कुछ माह पहले 'देश की सुरक्षा के लिए खतरा' बताकर जेल की सलाखों के पीछे डाला गया, उन्हें आज अचानक रिहा करने की बात आई यानी उनके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिले। ऐसे में उनकी हिरासत के 170 दिनों का हिसाब कौन देगा? उन्हें गिरफ्तार क्यों किया गया था?
खबरों के लिए सिर्फ हिंदुस्तान डिजिटल न्यूज़, व्हाट्स ऐप्प No. 9358447558
Leave a Comment