वीडियो न्यूज़ : राजस्थान में निकाय चुनाव पर बड़ी खबर : UDH मंत्री खर्रा ने कांग्रेस पर लगाया झूठ फ़ैलाने का आरोप, बोले - चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार

फोटो  : फाइल फोटो 

जयपुर , 01 अप्रेल 2026
रिपोर्ट  : एडिटर 

राजस्थान में नगर निकाय चुनाव को लेकर UDH मंत्री झाबर सिंह खर्रा का बड़ा बयान सामने आया है । खर्रा ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि नगर निकाय चुनावों को लेकर विपक्ष की अनर्गल बयानबाज़ी पूरी तरह झूठ, भ्रम फैलाने और राजनीतिक रोटियां सेंकने की एक सोची-समझी नाकाम तरकीब के अलावा कुछ भी नहीं है।

 

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की मंशा बिल्कुल स्पष्ट है कि चुनाव जल्द से जल्द हों, और इसके लिए सभी आवश्यक वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन पूरी निष्ठा के साथ किया जा रहा है।

डोटासरा पर तंज :-
खर्रा ने बिना डोटासरा का नाम लिए कहा कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जिस तरह अनर्गल बयान दे रहे हैं, वह उनकी हताशा और बेबुनियाद राजनीति का जीता-जागता उदाहरण है। बेहतर होता कि वे दूसरों पर उंगली उठाने से पहले अपने गिरेबान में झांकते, क्योंकि अपने ही कार्यकाल में उन्होंने चुनाव प्रक्रिया को मजाक बनाकर रख दिया था। आज वही लोग ज्ञान बांट रहे हैं, जो तब जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह विफल रहे थे।

खर्रा ने आगे कहा कि सच्चाई यह है कि राजस्थान सरकार ने नगर निकाय चुनावों के लिए जितना कार्य करना था, वह सितंबर 2025 में ही पूरा कर अधिसूचनाएं प्रकाशित कर दी थीं। इतना ही नहीं, इस विषय को लेकर माननीय सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अपील भी दायर की गई थी।

बता दे कि ओबीसी आयोग का कार्यकाल बढ़ाने के बाद चुनाव को लेकर असमंझस बना हुआ है कि सुप्रीम कोर्ट में दिए गये समय में चुनाव शायद ही हो । इसको लेकर कांग्रेस लगातार हमलावर है । इस बीच अब UDH मंत्री का यह बयान सामने आया है ।

संवैधानिक बाध्यता :-
खर्रा ने कहा कि ‘ट्रिपल टेस्ट’ के आधार पर राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट प्राप्त हुए बिना आरक्षण देना संभव ही नहीं है। यह संवैधानिक बाध्यता है, कोई राजनीतिक इच्छा नहीं।

उन्होंने कहा कि विधानसभा में स्वयं कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और उनके नेताओं ने यह मुद्दा उठाया था, तब भी मैंने साफ कहा गया था कि यदि वे पिछड़ा वर्ग को बिना आरक्षण के चुनाव करवाना चाहते हैं तो लिखित में मांग दें। लेकिन आज तक विपक्ष का एक भी पत्र सामने नहीं आया। कारण साफ है, विपक्ष को समाधान नहीं, केवल सिर्फ सियासी शोर मचाना है।

खर्रा ने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग और पिछड़ा वर्ग आयोग दोनों स्वतंत्र संवैधानिक संस्थाएं हैं। ये अपने अधिकार क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से कार्य करती हैं और राज्य सरकार का इनमें किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं है। जैसे ही ये संस्थाएं अपनी रिपोर्ट और निर्णय प्रस्तुत करेंगी, राज्य सरकार तुरंत आगे की कार्रवाई करते हुए चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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