फोटो : फाइल फोटो
जयपुर, 09 अप्रेल 2026
रिपोर्ट : एडिटर
एसीबी ने जल जीवन मिशन घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल को गिरफ्तार किया है। IAS सुबोध अग्रवाल का 31 दिसंबर, 2025 को रिटायरमेंट था, इससे ठीक पहले भजनलाल सरकार ने मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी थी। फर्जी टेंडर और पद के दुरुपयोग के आरोपों को लेकर अब उनसे गहन पूछताछ की जा रही है।
पिछले महीने ही 13 मार्च को एसीबी कोर्ट ने अग्रवाल के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया था। 17 फरवरी से अग्रवाल का फोन बंद हो गया था। अग्रवाल को पकड़ने के लिए एसीबी की टीमें अलग-अलग शहरों-प्रदेशों में छापे मार रही थीं।
10 को पहले किया गिरफ्तार:-
एसीबी के महानिदेशक गोविंद गुप्ता ने प्रेस वार्ता में बताया कि यह कार्रवाई टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी और पद के दुरुपयोग से जुड़े मामले में की गई है। आरोप है कि फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर टेंडर जारी किए गए और शर्तों में हेरफेर कर 50 करोड़ रुपए तक के प्रोजेक्ट्स मंजूर किए गए। इस प्रकरण में पहले ही 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि तीन अन्य आरोपी अब भी फरार हैं। उनके खिलाफ स्टैंडिंग वारंट जारी कर संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
1988 बैच के आईएएस अधिकारी:-
डॉ. सुबोध अग्रवाल 1988 बैच के आईएएस अधिकारी रहे हैं और राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों में गिने जाते रहे हैं। वे जलदाय, खनन, ऊर्जा और चिकित्सा जैसे अहम विभागों में अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर कार्य कर चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग में सचिव रहते हुए उनकी अन्नपूर्णा भंडार योजना को नीति आयोग से भी सराहना मिल चुकी है। इस मामले में केवल अग्रवाल ही नहीं, बल्कि करीब 170 अधिकारी और कर्मचारी भी जांच के दायरे में हैं। उनके परिवार के सदस्य भी उच्च पदों पर कार्यरत हैं, जिनमें उनकी पत्नी आयकर विभाग में मुख्य आयुक्त और पुत्र भारतीय राजस्व सेवा में अधिकारी हैं।
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