फोटो : फाइल फोटो
जयपुर, 12 अप्रेल 2026
रिपोर्ट : एडिटर
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रिफाइनरी प्रोजेक्ट को लेकर भाजपा सरकार की नीतियों और देरी पर जमकर प्रहार किया। गहलोत ने प्रोजेक्ट की लागत में हुई बेतहाशा बढ़ोतरी को जनता के पैसे की बर्बादी बताते हुए सवाल किया कि आखिर इस 'सेटबैक' का असली जिम्मेदार कौन है? गहलोत ने कहा कि भाजपा के ऐसे नेताओं द्वारा रोजाना बयानबाजी हो रही है जिन्हें रिफाइनरी प्रोजेक्ट का ABCD नहीं पता।
गहलोत ने आगे कहा कि जिस रिफाइनरी का शिलान्यास सोनिया गांधी और तत्कालीन केंद्रीय मंत्री वीरप्पा मोइली के समय हुआ था, उसे भाजपा ने राजनीतिक द्वेष के चलते वर्षों तक लटकाए रखा। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि "कहां 37 हजार करोड़ की योजना थी और आज यह 80 हजार करोड़ के पार पहुंच गई है। यह 43 हजार करोड़ का अतिरिक्त भार राजस्थान की जनता की जेब पर है। 2014 से 2018 तक इस काम को बंद क्यों रखा गया? अब 2024 का वादा करके इसे 2026 तक खींच लिया गया है।"
पूर्व सीएम ने कहा कि जिनको रिफाइनरी के बारे मेंABCD नहीं मालूम है, उनको बैठा बैठा कर के प्रेस कॉन्फ्रेंस करवा रहे हैं । उन्होंने कहा कि प्रेस कांफ्रेंस में बैठाना ही था तो वसुंधरा जी को बैठाना था। उनको तो मालूम था कि क्या मैंने गलती करी नहीं करी। हमारे वक्त में एग्रीमेंट में क्या कमी रही या उनको गलतफहमी थी , वो क्लियर कर सकती थी।
गहलोत ने कहा कि कुछ पता नहीं लोगों को और भाषण ठोंके जा रहे हैं। मेरे उपर अटैक किए जा रहे हैं । बीजेपी के अध्यक्ष मदन राठौड़ को कहूंगा कि आप ऐसे लोगों का चयन करो या फिर पहले स्टडी करो, पूरी रिसर्च करो। सरकार आपके पास में केंद्र में भी, राज्य में आप तो पता लगा सकते हो हमारी क्या कमी है।
सीएम पर तंज :-
गहलोत ने किसानों को लेकर सीएम के वायरल बयान पर कहा कि मैं मुख्यमंत्री के बारे में मै क्या बोलू । वो 20 दिन काम कर सकते हैं। खुद किसान बन सकते हैं। किसान ही थे वो उस अनुभव को काम में लें।
अब पता नहीं खुद ही 20 दिन काम करते होंगे। मुझे तो यही लगता है कि ये केवल नाम की किसानी कर रहे होंगे और खुद ही 15–20 दिन मुश्किल से जाते होंगे वही अनुभव इनका काम आ रहा है। । और बोल रहे हैं कि किसान लोग सभी 15–20 दिन ही काम करते हैं।
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